2026 का बजट – “लोअर सर्किट बजट” क्यों कहा जा रहा है?कैसे शेयर मार्किट के इन्वेस्टर होगा भारी नुकसान जानिए आसान भाषा में।

पिछले डेढ़ साल से बाजार क्यों कमजोर है?
2026 का यह बजट जब भी याद किया जाएगा लोअर सर्किट बजट के नाम से याद किया जाएगा। उसके पीछे कारण भी कुछ वैसा ही है। देखिए इन्वेस्टर कम्युनिटी के सारे लोग आज सुबह 11:00 बजे टीवी के सामने बैठे। एक्सपेक्टेशन बड़ी सिंपल थी कि पिछले कुछ टाइम में पिछले कुछ सालों में जो बजट्स हुए वो ना भूतो ना भविष्य टाइप के थे रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए। क्यों? क्योंकि भाई हमारा एसटीटी बढ़ाया गया। यानी सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाया गया। हमारा कैपिटल गेन टैक्स। फिर उसमें एसटीसीजी हो या एलटीसीजी लॉन्ग टर्म या शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन दोनों के दोनों बढ़ाए गए। ऐसे में काफी सारे फिर सवाल उठने लगे मार्केट पर कि इतना ज्यादा आपने बढ़ाया तो इससे इन्वेस्टर कम्युनिटी पर फर्क पड़ेगा, मार्केट पर फर्क पड़ेगा और फिर वो फर्क पड़ना शुरू हुआ।
हमने देखा कि पिछले एक डेढ़ सालों से मार्केट में कोई एक्टिविटी नहीं है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स जिन्हें हम एफआईआई के नाम से जानते हैं वो लाखों करोड़ों रुपए लेकर मार्केट से रफादफा हो। जिसके चलते मार्केट को अगर किसी ने बचाया तो वो बचाया रिटेल इन्वेस्टर्स ने। अगर यह ना आते मतलब आप मेरे जैसे लोग मार्केट में इन्वेस्ट ना करते तो मार्केट की हालत काफी बुरी हो जाती। इसका इकॉनमी पर भी इंपैक्ट होता है। ये सिर्फ आपके प्रॉफिट लॉस तक लिमिटेड नहीं है। जब मार्केट बहुत ज्यादा गिरता है जैसे पिछले तीन-चार महीने में काफी गिर रहा है तो नई कंपनीज़ अपना आईपीओ भी नहीं लाती। आईपीओ नहीं लाएगी तो पैसा नहीं उठा पाएगी और अगर ये ऐसा ही लंबे दौर तक जारी रहा तो ये इकॉनमी के लिए भी प्रॉब्लम क्रिएट करता है पर्टिकुलरली इंडिया जैसी डेवलपिंग इकॉनमी के लिए। इसीलिए सबका एक सिंपल एक्सपेक्टेशन था कि एसटीटी कम हो जाए। कैपिटल गेन टैक्सेस कम हो जाए। अब इसमें यह एक्सपेक्टेशंस ऐसे ही सेट नहीं हुए। बड़े-बड़े लोगों ने एक्सपेक्टेशन लगाए थे। कुछ-कुछ ने वेट किया कि हां यह कम होगा ही होगा।
बजट से पहले बाजार की उम्मीदें क्या थीं?
नितिन कामत जो कि zerodha के फाउंडर हैं। उन्होंने भी सिंपली कहा था कि एसटीटी काफी बढ़ चुकी है। मार्केट पर उसका इंपैक्ट भी आया है। उन्होंने हालांकि कुछ डाटा सेट भी बताया था कि ऑलदो गवर्नमेंट ने पिछले साल एसटीटी बढ़ाया लेकिन उतना वो ज्यादा फायदा नहीं हुआ उस एक साल के बढ़े हुए एसटीटी से। तो इसीलिए शायद यह कम होना चाहिए। अब इसी आशा से सब लोग जब बैठे टीवी के सामने तो शुरुआत में कुछ टाइम तो बजट में बाकी इधर-उधर की बातें होने लगी। जिसमें कुछ मैन्युफैक्चरिंग कंपोनेंट जो था उसका जो आउटले था वो पहले ₹25,000 करोड़ का था। उसे 40,000 करोड़ किया गया।
बजट की शुरुआत में बाजार खुश क्यों हुआ?
मैन्युफैक्चरिंग में काफी कुछ इंटरेस्टिंग चीजें गवर्नमेंट ने की। जैसे उन्होंने पीएलआई इंसेंटिव शुरू किए थे प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव। उसका एक्चुअल में फायदा भी हुआ dxon और उस जैसी कंपनीज़ को और इंडिया को। इंडिया का मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग 10 टाइम्स बढ़ा है पिछले 10 सालों में। अब यही चीज कंपोनेंट जो है छोटे-छोटे कंपोनेंट वहां उस तरफ जा रही है। तो अच्छी बात थी। लोगों ने अप्रिशिएट किया। धीरे-धीरे और भी उन्होंने कुछ दो चार डिसीजंस लिए जिससे मार्केट खुश भी हो गया। जिसमें से एक था कि 2047 तक जो ग्लोबल क्लाउड कंपनीज़ है वो अगर इंडिया के डाटा सेंटर्स को यूज़ करती है तो 2047 तक उन्हें टैक्स सॉलिड ही मिलेगा। जैसे ये न्यूज़ आई डाटा सेंटर कंपनीज़ है 8- 10% बढ़ गई। उसमें ई टू ई है उसमें अनंत राज है थोड़े बहुत लेवल पर और जब इन्होंने कॉमोनेंट मैन्युफैक्चरिंग की बात की तब DXON वगैरह कंपनीज़ के शेयर प्राइसेस बढ़ने लगे। खुशी का माहौल था।
आखिरी 15 मिनट में खेल कैसे पलट गया?
फिर अचानक आए लास्ट के 15 मिनट और माहौल तुरंत बदल गया। हुआ ये कि सरकार ने कहा कि जो एसटी जैसे एसटी नाम लिया लोगों को लगा अब ये डिक्रीज की बात होगी। लेकिन बात हुई इनक्रीस की कि एसटी बढ़ेगा कितना बढ़ेगा तो यह ऑप्शंस के लिए 50% बढ़ेगा 50% और फ्यूचर्स के लिए 150% बढ़ेगा। जैसे न्यूज़ आई पूरा मार्केट डाउन BS देखो लोअर सर्किट कई सारे ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स हैं Jal वन जैसे लोअर सर्किट उसमें आप कमोडिटी एक्सचेंजेस MCX जैसे देखोगे 10 से 15% डाउन और पूरा मार्केट ही ओवरऑल देखोगे आप मिड cap इंडेक्स लगभग 22% नीचे चला गया ससेस निफ्टी लगभग 1% डाउन चले गए और मार्केट में हर कोई बात कर रहा था जो मैं बजट के टाइम जो लाइव चैट में पढ़ रहा था सब बोल रहे थे वस्ट बजट कुछ-कुछ लोगों ने यह तक कह दिया कि संडे के दिन यह मार्केट इसलिए खुला रखा है क्योंकि लोगों ने जितना प्रॉफिट कमाया मार्केट से वो भी वॉश आउट हो जाए।
एसटीटी और कैपिटल गेन टैक्स का इतिहास
कुछ इस तरह की चीजें लेकिन एक चीज पर जो बहुत सारे लोगों के समझ में नहीं आई उस पर मैं यहां पर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। बहुत सारे लोगों को लगता है कि ठीक है थोड़ा बहुत तो एसटीटी बढ़ाई थोड़ा बहुत तो यह बढ़ाया टैक्सेस बढ़ाया है तो यहां पर जो एसटीटी और एलटीसीजीटी को शुरुआत हुई वहां से मैं कुछ इंटरेस्टिंग चीजें आपको बताना चाहता हूं देखिए 1992 तक जो भी कैपिटल गेन टैक्सेस थे आपके स्टॉक मार्केट से प्रॉफिट से जो भी पैसा आता था जो भी आपकी इनकम है उसके अनुसार आपको देना पड़ता था इनकम टैक्स के अनुसार फिर बाद में इसे 20% किया गया विद इंडेक्सेशन बेनिफिट फिर 2004 में कुछ ऐसी चीज हुई जिसने पूरे स्टॉक मार्केट सिनेरियो को बदल दिया पी चिदंबरम ने 2004 का बजट पेश किया बजट में उन्होंने बताया कि अब एलटीसीजी आपको नहीं लगी लगेगा। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा। लॉन्ग टर्म में इन्वेस्ट कर रहे हो, प्रॉफिट कमा रहे हो, अपने पास ही रखो। तो, इन्होंने एक तरह से मोटिवेट करने की कोशिश की। लेकिन यह मोटिवेशन थोड़ा दोगला था। उन्होंने कहा कि मोटिवेशन तो है एलटीसीजी का लेकिन हम आपको एसटीटी लगाएंगे। यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स की उन्होंने शुरुआत की। साथ ही एसटीसीजी यानी एक साल से कम टाइम पीरियड के लिए इन्वेस्ट कर रहे हो तो उस पर भी आपको 10% का टैक्स देना पड़ेगा। अब उस टाइम उन्होंने जो एसटीटी लगाया वह कुछ इस प्रकार था कि डिलीवरी इक्विटी के लिए वह 0.125% था और फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के लिए वह 0.017% था। अब जैसे ही ये लागू हुआ तो मार्केट में जो तुरंत इंपैक्ट था वो थोड़ा नेगेटिव ही था। बहुत सारे ब्रोकर्स के बिनेसेस भी थोड़े बहुत डालमडोल हो गए क्योंकि अचानक से ये मतलब एक आपने हटा दिया लेकिन काफी बड़े लगा दिए। तो ओवरऑल एक कुछ खास इफेक्ट नहीं था। हालांकि लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए अच्छी बात लेकिन बाकी जो ट्रेडर वगैरह कम्युनिटी की थी उनके लिए तो काफी नेगेटिव चीज थी और ब्रोकिंग इंडस्ट्री को वही चलाते हैं। अब यह सारी चीजें होने के बाद कुछ ब्रोकर्स वगैरह ने मार्केट में प्रोटेस्ट करना शुरू किया। प्रोटेस्ट के चलते हुआ यह कि 2012 में जो डिलीवरी इक्विटी का एसटीटी है वो कम करके हो गया 0.10% फिर 2013 में इसे अच्छा खासा कम किया गया। फिर 2013 में फ्यूचर्स ऑप्शंस का जो एसटी है उसे भी कम किया गया ब्रोकर्स की प्रोटेस्ट के चलते। और उसके बाद फिर चारप साल सारी चीजें सही थी। कोई चेंजेस नहीं थे। कुछ नहीं। इन्वेस्टर कम्युनिटी आ रही थी। मार्केट में पैसा इन्वेस्ट किया जा रहा था। फिर आया 2018 अरुण जेटली आए अपना बजट लेकर और इन्होंने एक चीज की कि भाई जो पी चिदंबरम ने एलटीसीजी हटा के एसटीटी लाया था तो अरुण जेटली ने बोला कि अब वो एसटीटी तो रहेगा जो पहले था लेकिन अब आपको एलटीसीजी यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स भी देना पड़ेगा कितना 10% का ₹1 लाख के ऊपर के प्रॉफिट पर यानी कि पहले एक को हटाकर दूसरा लाया गया 2018 में फिर दोनों लाए गए। फिर अरुण जेटली की डेथ के बाद निर्मला सीतारमण बनी फाइनेंस मिनिस्टर। फिर 2023 में इन्होंने पहले जो एफएओ है उसका एसटीटी 25% से बढ़ाया। 2025 में उन्होंने वो डबल कर दिया। साथ ही उन्होंने कैपिटल गेन टैक्स भी और बढ़ाया। 10% का एलटीसीजी 12.5% किया। 15% का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 20% कर दिया। बात यहीं पर नहीं रुकी। अब ये सारे इतने सारे टैक्सेस हो गए।
सरकार कितना कमा रही है?
मतलब मैं आपको बता दूं कि 2014 में जिस एसटीटी से सरकार को ₹6000 करोड़ मिल रहे थे। पिछले साल उसी एसटीटी से उन्होंने कितने रुपए कमाए? ₹54,000 करोड़। कितने गुना बढ़ा आप देख लीजिए। इसी के साथ अभी शुरुआत के 9 महीने में इस साल के 44,000 करोड़ का एसटीटी इन्होंने कमाया है। इंटरेस्टिंग चीज यह भी है कि काफी डबल एसटीटी करने के बाद भी इनका एसटीटी डबल नहीं हुआ है क्योंकि बहुत सारे लोग मार्केट छोड़ के भाग गए। एफआई वगैरह भी भाग गए।
रिटेल और ट्रेडर्स क्यों परेशान हैं?
रिटेल इन्वेस्टर्स ने भी यहां पे इंटरेस्ट जो है वो छोड़ दिया। अभी कोई क्रिप्टो की तरफ गया है। कोई आजकल कमोडिटीज की तरफ चला गया है। दे आर जस्ट फिगरिंग आउट अदर मार्केट। क्योंकि यहां पर एफएओ में काफी सारे और भी चेंजज़ हुए हैं और वैसे भी मार्केट पिछले 1 डेढ़ साल से कुछ ख़ास परफॉर्म नहीं कर रहा है। तो लोग इधर-उधर जाना पसंद कर रहे हैं। जिसके चलते जो एसटीटी है जो सरकार का मे बी जो मकसद होगा कि एफएओ ट्रेडिंग को कम करने का साथ ही पैसा कमाने का तो पैसा कमाना तो थोड़ा भी कम हुआ है।
सरकार को क्या समझना होगा?
यानी कि अगर मैं शॉर्ट में आपको बात करूं तो जब से एसटीटी आया है तब से इन्होंने लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ का एसटीटी अब से कलेक्ट किया है। और जो एलटीसीजी का एक्चुअली डाटा नहीं आता है कि एग्जैक्टली कितना यह अदर इनकम टैक्स के साथ ही मिक्स अप हुआ होता है। तो इसलिए वह फिगर आउट करना हमारे लिए टफ था लेकिन वह भी काफी बढ़ चुका होगा। अब यह जो एलटीसीजी और एसटीटी है इनका एक अलग से डाटा नहीं आता है। तो अगर मैं डायरेक्ट टैक्स का डाटा देखूं तो पहले ऐसा हुआ करता था कि कॉर्पोरेट टैक्स काफी ज्यादा पैसा सरकार को कमा कर देते थे और उसमें काफी ज्यादा ग्रोथ हो रही थी। लेकिन पिछले 5 सालों में देखा जाए तो जो लोग जो टैक्स पे कर रहे हैं डायरेक्ट टैक्स वो डबल से बढ़ा है पिछले 4 सालों में। वही कॉर्पोरेट के लिए वो डबल नहीं हुआ है। वो लगभग 50-60% से ही बढ़ा है। और अभी जो इंडिविजुअल्स हैं डायरेक्ट टैक्स में वो ज्यादा कंट्रीब्यूट कर रहे हैं कॉर्पोरेट से ज्यादा। कॉर्पोरेट्स लगभग ₹10 लाख करोड़ कंट्रीब्यूट कर रही है सालाना और जो इंडिविजुअल्स हैं वह लगभग ₹14 लाख करोड़ कंट्रीब्यूट कर रहे हैं। तो प्राइम ऑफ से तो यही लग रहा है कि किसी को कुछ पड़ी नहीं है मार्केट में क्या हो रहा है? कैसे हो रहा है?
आगे बाजार में क्या हो सकता है?
क्या सिचुएशन है बट यही है कि और ज्यादा पैसा कैसे निकाल सकते हैं मार्केट से क्योंकि कई सारे लोग ऑप्शंस को फ्यूचर ऑप्शन को हैजिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं। वो एक्चुअल में एक्सरसाइज करते हैं। ठीक है? आप अगर कोई गैंबलिंग के लिए कर रहा है और ऑप्शन एक्सरसाइज नहीं कर रहा है तो ठीक था। उस पर आपने एसटीडी लगा दिया। लेकिन अगर कोई एक्सरसाइज कर रहा है उस पर भी आप लगा रहे हो। इट मींस कि आप हैजिंग भी मत करो और कर रहे हो तो आपको उस पर भी ज्यादा पैसे देने पड़ेंगे। कुछ इस तरह की सिचुएशन हुई है। ओवरऑल देखा जाए तो यह जो एसटीटी है बढ़ा हुआ आपको छोटा-छोटा दिखेगा। लेकिन पिछले 4 सालों में ये एसटीटी लगभग 500% बढ़ा है फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस के लिए 500% और इसी तरह जो एक्सपेक्टेशन था दूसरा कि भ LTCजी एटलीस्ट कम होगा। बढ़ाया है जितना बढ़ा था उतना कम होगा लेकिन वहां पर भी कुछ राहत यहां पर नहीं है। तो ओवरऑल देखा जाए तो मार्केट में इंस्पायर करें या मार्केट को मोटिवेट करे। ऐसा कुछ भी इस बजट में नहीं था। ओवरऑल जो नॉर्मल जो चीजें रहती है कि इंफ्रास्ट्रक्चर में हम इतना इन्वेस्ट करेंगे वह इतना इन्वेस्ट करेंगे। स्किल डेवलपमेंट की कुछ बातें हुई है।
जैसे एक दो पॉजिटिव चीजें वो मैंने आपको बता दी। बट ओवरऑल पूरी इन्वेस्टर कम्युनिटी को पूरे मार्केट को ऐसा कुछ खास मिले ऐसा तो इस बजट में कुछ भी नहीं है। और इसके अलावा अगर बात करूं तो जो न्यू टेक्नोलॉजीस है मार्केट में डाटा सेंटर एआई इनका काफी जिक्र हुआ। उसके लिए काफी कुछ इनिशिएटिव सरकार ला रही है। यह एक चीज पता चली और साथ ही अगर जो भी ब्लैक मनी वाले लोग हैं जिन्होंने अपने एसेट्स बाहर कंट्री में छुपा के रखे हैं। यानी कि अगर कुछ लोगों ने गलत काम करके पैसा कमाया तो आपको जेल जाने की भी जरूरत नहीं। ज्यादा पैसा आप दे दो सरकार को एंड यू आर आउट। तो कुछ इस तरह की भी अनाउंसमेंट यहां पर हुई है। तो ओवरऑल देखा जाए तो मुझे लगता है कि ऐसा टाइम आ गया है कि स्टॉक ब्रोकर्स को फिर से जो प्रोटेस्ट उन्होंने 2012-13 के आसपास किया था वैसा करने की जरूरत पड़ेगी। अदरवाइज फिर ऐसा ही अगर चलता रहा तो यह मार्केट मतलब बचना मुश्किल है। बिकॉज़ क्या है कि जो ट्रेडर्स होते हैं वह मतलब हालांकि फिनोशंस पर हमेशा लॉन्ग टर्म इन्वेस्टिंग की बातें करते हैं। लेकिन ट्रेडर्स का होना भी जरूरी है मार्केट में। क्यों? क्योंकि वो मार्केट में लिक्विडिटी प्रोवाइड करते हैं। और बहुत सारे जो इन्वेस्टर्स हैं लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर वो पहले धक्का खाकर ही आते हैं। पहले एफएओ में जाएंगे क्विक पैसा कमाने की कोशिश करेंगे। वहां पर लॉसेस होंगे। फिर आएंगे लॉन्ग टर्म की तरफ। अगर आप वो एंट्री पॉइंट ही बंद कर रहे हो बेसिकली तो यहां पर लॉन्ग टर्म जो एक्चुअल पैसा बनाने वाले इन्वेस्टर्स एक्चुअल में इंडियन इकॉनमी के साथ बने रहने वाले जो इन्वेस्टर्स हैं उनकी संख्या भी कम हो जाएगी और वो हम देख रहे हैं कि अभी काफी भारी मात्रा में कम हो रही है। वैल्यू्यूएशंस काफी नीचे जा रहे हैं और कंटिन्यू जा रहे हैं। अगर नया फ्लो मार्केट में नहीं आया आप चेयर नहीं कर रहे हो। मार्केट को कुछ नया नहीं ला रहे हो तो इट विल बी वेरी टफ फॉर द होल मार्केट। तो ये काफी एक सीरियस चीज है जिसके बारे में किसी ना किसी को आवाज उठानी पड़ेगी। नहीं उठाएंगे तो फिर ये ऐसे ही बजट आते रहेंगे। हर 2 साल में अपने टैक्सेस बढ़ते बढ़ते जाएंगे और कुछ होता होगा नहीं मतलब ऑलरेडी अपने इतने सारे टैक्सेस बढ़ाने के बाद आप देख सकते हो कि मतलब और बढ़ा रहे हो आप टैक्सेस मतलब इससे मतलब मार्केट ने क्या रिएक्ट किया है तो एवरीथिंग इज रियली हॉरेबल और इसी के चलते फिर होता क्या है कि लोग फिर गैंबलिंग करने लगते हैं बहुत सारे जो एप्स थे कुछ बाहर कंट्री से चलने वाले बैटिंग एप वहां पर लोग जाने लगते हैं बिकॉज़ लोगों को कुछ ना कुछ सही है तो गवर्नमेंट को यह भी समझना चाहिए ओवरऑल क्या फ्लो है क्या रिक्वायरमेंट है उस हिसाब से हम क्या कर रहे हैं नहीं तो फिर यह गलत जगह पैसा जाएगा बाहर कंट्री में वो लोग टैक्स कमाएंगे हमारे पास नहीं आएगा। आज आज के डेट में बहुत सारे लोग फॉरेन मार्केट में भी इन्वेस्ट करना बढ़ गया इन्वेस्टर्स का। जबकि इंडिया में अपर्चुनिटी की कोई कमी नहीं है। इनफैक्ट बाहर जाने वाले लोगों की संख्या बढ़ चुकी है। जबकि इंडिया में अपर्चुनिटी की कमी नहीं है। क्योंकि इसी तरह की जो टैक्स बढ़ाओ बढ़ाओ लोगों से खींचते रहो खींचते रहो चूसते चूसते कुछ बचेगा नहीं आदमी के पास।
अब आवाज उठाने की जरूरत है
इस तरह की सिचुएशन ओवरऑल बनती जा रही है। अगर ऐसा ही रहा तो बड़ा मुश्किल हो जाएगा। ओवरऑल इस कंट्री के लिए ओवरऑल इन्वेस्टर कम्युनिटी के लिए और पूरे स्टॉक मार्केट के लिए। तो आवाज उठाने की जरूरत है। मैं तो यहां पर उठा रहा हूं। आपको भी उठानी पड़ेगी। ब्रोकर्स को भी उठानी पड़ेगी और पूरी कम्युनिटी को एक साथ खड़े रह के यहां पर बात करनी पड़ेगी कि कुछ आप कीजिए एटलीस्ट नहीं कुछ कर रहे हो तो बढ़ाइए मत एटलीस्ट लेकिन ये धीरे-धीरे अब मैं बता रहा हूं आपको एसटीडी 500% से बढ़ा है ओवरऑल नेट नेट देखा जाए तो कुछ इस तरह की चीजें यहां पर हो रही है सरकार के टैक्स कलेक्शन बढ़ रहे हैं लेकिन लोगों की तकलीफें भी उसी के साथ बढ़ रही है तो फिलहाल यहीं पर रुकते हैं वही है कि लोअर सर्किट बजट की जो समरी है उसे यहां पर खत्म करते हैं।
देखिए मार्केट लगातार गिर रहा था। अभी बजट आ गया तो मुझे लगता है आने वाले टाइम में भी बजट अच्छा रहता तो थोड़े टाइम के लिए रिकवरी मिलती लेकिन मुझे लगता है आने वाले टाइम में ये लगातार गिरता रहेगा यहां पर लार्ज कैप बहुत ज्यादा ओवरवैल्यूड ऑलरेडी थे तो वहां पर उसकी वजह से भी तो मार्केट में ऑलरेडी लार्ज कैप बहुत ज्यादा ओवरवैल्यूड थे तो उनका गिरना तो आने वाले टाइम में वो भी तय है और इसी के साथ अभी इस बजट के साथ वो मोमेंटम है गिरावट का वो जारी रहेगा तो इस साल अप ओपोरर्चुनिटी आपको काफी ज्यादा मिलेगी तो एक साथ पैसा डालने की गलती मत कीजिए थोड़ा-थोड़ा-थोड़ा करके डालिए एंड बने रहिए मार्केट में लॉन्ग टर्म के लिए बिकॉज़ बाकी एफ एंडओ के लिए तो खत्म ही हो रही है चीजें फिलहाल यहीं पर रुकते हैं एंड और आपकी गाइस इस बजट पर राय है थोड़ा दो शब्द इस बजट के लिए आप भी कमेंट में जरूर बताइए।
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