Adani का Gujarat में नया Mega Plant: क्या India का Energy Crisis अब खत्म होने वाला है?

Adani ग्रुप ने गुजरात के खावड़ा में भारत का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम शुरू करने का ऐलान किया है। यह प्रोजेक्ट देश के एनर्जी क्राइसिस, ग्रिड स्टेबिलिटी और रात में बिजली की कमी को दूर करने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
भारत में सोलर एनर्जी बन रही है लेकिन स्टोरेज कहाँ है?
आपने घर की छतों पर सोलर पैनल्स तो देखे होंगे। सरकार सब्सिडी भी दे रही है लगवाने के लिए। कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूज़ में भी ये खूब इस्तेमाल हो रहे हैं। पर बड़ा सवाल यह है कि देश में जो सोलर एनर्जी बन रही है, वो स्टोर कहां हो रही है? ऐसा तो नहीं कि सोलर पैनल में जितनी बिजली बनी, वो सारी की सारी उसी वक्त यूज़ हो जाती है। और जब धूप न हो या रात का समय हो, तब क्या किया जाता है? इस समस्या को हल करने के लिए कई तरीके हैं—या तो बिजली विभाग की तरफ से सप्लाई मिल जाए या फिर बैटरी में एक्स्ट्रा एनर्जी को स्टोर किया जाए। लेकिन सवाल है: क्या हमारे पास पर्याप्त स्टोरेज सिस्टम्स हैं?
रिन्यूएबल एनर्जी बढ़ रही है, लेकिन अगले चरण की तैयारी नहीं
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी तो बढ़-चढ़ कर बन रही है, लेकिन उसके इस्तेमाल की अगली कड़ी यानी स्टोरेज का इंतज़ाम अभी भी अधूरा है। और रिन्यूएबल एनर्जी की बात हो और Adani ग्रुप का नाम न आए, ऐसा कैसे हो सकता है? 11 नवंबर 2025 को Adani ग्रुप ने एक प्रेस रिलीज जारी किया जिसमें बताया गया कि कंपनी भारत का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, यानी BESS, बनाने जा रही है। यह प्रोजेक्ट मार्च 2026 तक चालू हो जाएगा। इसकी कैपेसिटी 10126 मेगावाट पावर और 3530 मेगावाट-आवर एनर्जी स्टोरेज की होगी। आसान भाषा में समझें तो यह सिस्टम एक बार चार्ज होने पर 10126 मेगावाट पावर को 3 घंटे लगातार सप्लाई कर सकता है।
खावड़ा में बनेगा भारत का सबसे बड़ा बैटरी स्टोरेज हब
यह प्रोजेक्ट गुजरात के खावड़ा में बन रहा है जहाँ पहले से Adani का दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट मौजूद है। यह लोकेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सोलर प्लांट के पास ही बैटरी होने से ट्रांसमिशन लॉस कम हो जाता है।
बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) क्या होता है?
अब सवाल उठता है कि आखिर यह बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम होता क्या है? इसे आप पावर बैंक की तरह समझिए। जैसे हम अपने फोन के लिए पावर बैंक रखते हैं, वैसे ही राष्ट्रीय स्तर पर हम सूरज और हवा से बनने वाली बिजली को बैटरियों में स्टोर करेंगे।
रिन्यूएबल एनर्जी अनिश्चित है—BESS इस समस्या का समाधान है
सोलर पैनल दिन में, खासकर दोपहर में, ज्यादा एनर्जी बनाते हैं। लेकिन शाम को सूरज डूब जाता है। विंड टर्बाइन हवा पर निर्भर हैं—हवा तेज है तो बिजली बनेगी, नहीं तो उत्पादन रुक जाएगा। यानी रिन्यूएबल एनर्जी पूरी तरह अनिश्चित होती है। इसलिए जरूरत पड़ती है BESS जैसी तकनीक की। फिलहाल कमी होने पर बिजली विभाग के ग्रिड से सप्लाई ली जाती है और अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज दी जाती है, जिसे कहते हैं नेट मीटरिंग। बैटरी का उपयोग भी होता है, लेकिन ज्यादा मेंटेनेंस और लागत की वजह से अभी तक ये बड़े स्तर पर अपनाई नहीं गई।
भारत का एनर्जी ट्रांजिशन और स्टोरेज की बढ़ती जरूरत
भारत का एनर्जी ट्रांजिशन जारी है और जैसे-जैसे हम रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ बढ़ रहे हैं, स्टोरेज की जरूरत और बढ़ती जा रही है। बड़े स्केल के प्रोजेक्ट्स लगेंगे, तब ही हम सेल्फ रिलायंट बन पाएंगे। इस तरह के प्रोजेक्ट्स से भारत में बैटरी मॉड्यूल से लेकर सेल्स और रिफाइनिंग तक की पूरी वैल्यू चेन डेवलप होने लगेगी। यह नई जॉब्स, नई इंडस्ट्री और नई इकोनॉमिक एक्टिविटी पैदा करेगा।
Adani का मेगा BESS प्रोजेक्ट भारतीय स्टोरेज क्षमता को 4 गुना बढ़ाएगा
Adani का यह BESS प्रोजेक्ट 700 से ज्यादा कंटेनर्स में लगाया जाएगा—मतलब करोड़ों फोन बैटरियों का एक साथ रूप। लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2025 तक भारत के पास सिर्फ 360 मेगावाट BESS कैपेसिटी थी। जबकि Adani का यह अकेला प्रोजेक्ट उससे चार गुना ज्यादा क्षमता लेकर आने वाला है। इसका मतलब है कि स्टोरेज सेक्टर अभी तक काफी अंडरडेवलप्ड रहा है।
भारत की बिजली अभी भी 70% कोयले पर निर्भर—यही है बड़ी समस्या
भारत की 70% बिजली कोयले से आती है। और जो रिन्यूएबल एनर्जी बनती है, उसके लिए स्टोरेज की व्यवस्था ही नहीं है, जिससे बहुत सी क्लीन एनर्जी बर्बाद होती है या ग्रिड ओवरलोड हो जाता है।
500 GW रिन्यूएबल लक्ष्य बिना स्टोरेज के अधूरा
भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी बनाने का है, लेकिन अगर स्टोरेज सिस्टम नहीं होगा, तो यह लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। दिन में बनी एनर्जी बैटरी में स्टोर हो सके, यही भविष्य की जरूरत है। ग्रिड स्थिर रहे, फ्रीक्वेंसी और वोल्टेज बैलेंस हो, लोड मैनेजमेंट सही हो—यह सब BESS के बिना संभव नहीं है।
सरकार का लक्ष्य 2032 तक 47 GW BESS क्षमता बनाने का
सरकार ने 2032 तक 47 गीगावाट BESS कैपेसिटी बनाने का लक्ष्य रखा है और प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव्स देकर इसे बढ़ावा भी दे रही है।
Adani का 24×7 रिन्यूएबल पावर मॉडल—एक भविष्य की रणनीति
Adani ग्रीन एनर्जी के पास पहले से ही 15,500 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी है। ऐसे में खुद का BESS बनाना एक मास्टर स्ट्रेटजी है। इससे 24×7 रिन्यूएबल पावर सप्लाई संभव होगी, जिससे बड़ी कंपनियां और इंडस्ट्रियल यूनिट्स Adani से प्रीमियम पर बिजली ले सकेंगी।
ट्रंप का नया बयान—भारत पर लगे टैरिफ़ कम होंगे
10 नवंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए नए एंबेसडर सर्जियो गर की नियुक्ति की। इस मौके पर ट्रंप ने कहा कि भारत पर लगाए गए 50% तक टैरिफ़ कम किए जाएंगे, क्योंकि भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है।
भारत का जवाब—रूसी तेल कम करने का कारण आर्थिक था, दबाव नहीं
भारत की पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने साफ किया कि रूस से तेल खरीदना कम करना आर्थिक कारणों से था, किसी के दबाव में नहीं। लेकिन फिर भी ट्रंप के बयान हमेशा चर्चाओं में रहते हैं।
आप रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं?
अंत में सवाल वही—क्या आप सोलर जैसी रिन्यूएबल एनर्जी का इस्तेमाल करते हैं? हमें कमेंट में जरूर बताएं। बाकी अपना ख्याल रखिए।