Life Is Difficult – यही सोच Cristiano Ronaldo को दुनिया का बेस्ट फुटबॉलर बना गई।

0
Ronaldo Success Story Case Study

Ronaldo Success Story Case Study

खुद से जीतने वालों को मेरा सलाम और प्रणाम द रोडलेस ट्रैवल्ड किताब की पहली दो लाइने हैं जीवन कठिन है जिस दिन आप यह स्वीकार लेते हो उस दिन से जीवन आसान हो जाता है। जी हां जीवन आसान हो जाता है क्योंकि आप ताकतवर बनने के लिए सैक्रिफाइस करने के लिए तैयार हो जाते हो रोनाल्डो के बचपन में ही ऐसी परिस्थितियां बनी जिससे वे बहुत जल्दी समझ गए कि जीवन कठिन है और सफलता बलिदान मांगती है ।

रोनाल्डो के पिता युद्ध से लौटने के बाद मानसिक रूप से परेशान थे उनके पास कोई जॉब नहीं था उन्होंने सच्चाई को हैंडल करने के लिए शराब का सहारा लिया मां चार बच्चों का खर्चा चलाने के लिए दो-दो जॉब्स करती घर के नाम पर टीन की छत थी इसके साथ-साथ रोनाल्डो बचपन से कमजोर था स्कूल के बच्चे अक्सर रोनाल्डो की गरीबी और कमज जोर कत काठी का मजाक उड़ाते।

रोनाल्डो के गॉडफादर कहते हैं कि वह आम बच्चों जैसा ही था उसमें कोई खास विशेषता नहीं थी लेकिन उसके अंदर कुछ करने की अदम्य इच्छा थी रोनाल्डो के अंदर फुटबॉल का इतना जुनून था वो प्लास्टिक की बोतल से या मोजे और पन्नी की बॉल बनाकर दिन भर खेलता रहता स्कूल से वापस आता तो खाना छोड़कर भाग जाता और देर रात तक उबड़ खाबड़ गलियों में अकेला ही प्रैक्टिस करता रहता इसी प्रैक्टिस ने उसकी ड्रिबलिंग और बैलेंस की नीव रखी रोनाल्डो ने बहुत जल्दी सीख लिया था कि कुछ अच्छा करने के लिए बड़ा त्याग करना पड़ता है वे कहते हैं कि मेरी मां दो-दो जगह काम करती दूर तक पैदल चलती और रात में भूखी सो जाती ताकि मैं फुटबॉल खेल सकूं पैसे की कमी के बावजूद उन्होंने मुझे बाहर भेजने का फैसला किया दोस्तों आज सुख सुविधाओं और टेक्नोलॉजी के बीच में हमें यह लगता है कि जिंदगी आसान होनी चाहिए इसलिए जब भी तकलीफ होती है तो हम अपना रास्ता बदलने लगते हैं या शिकायत करते हैं क्योंकि हम भूल चुके हैं कि संघर्ष जीवन का सच है हम आज यह भूल गए हैं कि हर अच्छी चीज हर अच्छी आदत के लिए कीमत चुकानी पड़ती है अगर कुछ आसानी से मिल भी जाए तो वह एक अपवाद यानी एक्सेप्शन है।

इसलिए जिस दिन से आप यह स्वीकार लोगे कि लाइफ इज डिफिकल्ट जीवन आसान होने के लिए नहीं बस उसी दिन से मुश्किलें आपको विचलित नहीं कर पाएंगी क्योंकि आपको समझ आ जाएगा कि कंबल की गर्मी में रहकर मैं गोल पूरे नहीं कर सकता। रोनाल्डो लिस्बन पहुंचे और यहां सैक्रिफाइस का नया अध्याय शुरू होने वाला था देश की राजधानी लिस्बन में सबसे अच्छी फुटबॉल कोचिंग और बेहतरीन स्कूल्स थे लेकिन 11 साल के रोनाल्डो के लिए यह जीवन का सबसे कठिन समय था कारण अकेलापन और प्रेशर अकेलापन इसलिए लिए क्योंकि मदिरा और लिस्बन में भाषा बोलने के तरीके में यानी प्रोनंसिएशन में अंतर है। रोनाल्डो अपने शहर के तरीके से बोलते जो लिस्बन के लड़कों को बहुत अजीब लगता वे रोनाल्डो का मजाक उड़ाते और कई अजीब नामों से चढ़ाते परिवार से दूर 11 साल के रोनाल्डो अकेला महसूस करते और हर रात रोते हुए सोते दूसरी तरफ लिस्बन स्पोर्टिंग क्लब का माहौल बेहद कंपटिंग था उनके कमजोर शरीर झांकती हुई के कारण क्लब के लोगों को उम्मीद ही नहीं थी कि रोनाल्डो कभी प्रोफेशनल फुटबॉलर बन पाएंगे हालात इतने मुश्किल हुए कि क्लब ने उन्हें तीन-चार दिन के लिए घर वापस बेज दिया इन तीन-चार दिनों में रोनाल्डो ने ना जाने क्या सोचा पर जब वे वापस आए तो उनके सर पर अलग जुनून सवार था रोनाल्डो पहले से ही मेहनत कर रहे थे लेकिन लौटने के बाद वो ट्रेनिंग के अलावा घंटों प्रैक्टिस करते अपनी कमजोरियों पर काम करते रात में जब बाकी खिलाड़ी आराम कर रहे होते तब रोनाल्डो अपने दोस्त मिगल पैक्साओ के साथ रात में छिपकर जिम जाते वहां वे दो घंटे एक्स्ट्रा ट्रेनिंग करते रोनाल्डो के बेहतरीन खेल के कारण 18 साल की उम्र में मैन्यू ने उन्हें साइन कर लिया क्रिटिक्स का कहना था कि यह छोटी उम्र का लड़का इतने बड़े क्लब का प्रेशर नहीं झेल पाएगा पर वह यह नहीं जानते थे कि रोनाल्डो को अब तक समझ आ चुका था दुनिया का सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर बनने के लिए उन्हें मेंटली फिजिकली और इमोशनली बेहतर होते जाना है।

रायन हॉलिडे कहते हैं कि डेडिकेशन का मतलब है कठिन अभ्यास करने का लॉन्ग टर्म कमिटमेंट खासकर तब जब परिस्थिति मुश्किल हो जाए। दोस्तों, एक एग्जाम और एक रिजल्ट बेहतर या बेकार जीवन नहीं बनाता आपको हमेशा अच्छे रिजल्ट पैदा करने के लिए सीखने और अभ्यास करने का लॉन्ग टर्म कमिटमेंट चाहिए होता है, इसी लॉन्ग टर्म कमिटमेंट के कारण एक वो समय आया, जब कमजोर समझा जाने वाला लड़का सबसे फिट प्लेयर के रूप में जाना जाने लगा दोस्तों डेडिकेशन पैदा करने के लिए इस  ब्लॉग से सबसे पहली सीख यह लेकर जाओ कि जीवन में संघर्ष बहुत जरूरी है। अगर आपको किस्मत से बिना कीमत चुकाए कुछ मिल भी जाए तो आपका वही हाल होगा जो 95 पर लॉटरी जीतने वालों का होता है बुरे दौर से लड़ने के लिए उनके पास धैर्य संकल्प कमिटमेंट वर्क एथिक और विश्वास नहीं होता, जिस कारण वे जीते हुए पैसे कुछ ही दिनों में खो देते हैं और पहले से भी बहुत ज्यादा दुख और शिकायत से भर जाते हैं, इसलिए जल्दी से जल्दी संघर्ष को स्वीकारो जानों की सफलता बलिदान मांगती है और खुद को मजबूत बनाओ दूसरी बात खुद को धोखा देना बंद करो अंदर ही अंदर हम सबको पता होता है कि आज के एक्शंस का आज की आलस और मक्कारी का भविष्य में क्या रिजल्ट होगा लेकिन हम फिर भी खुद को धोखा देते रहते हैं। हम चमत्कार की उम्मीद करते हैं कि आखिर में शायद थोड़ी मेहनत करेंगे तो कुछ रिजल्ट बदल जाएगा लेकिन हम खुद को धोखा क्यों देते हैं क्योंकि अंदर से एक आवाज डराती है तुम वैसे ही लायक नहीं हो। अभी मुझे कर लो आगे की किसे खबर और हम इस डर की आवाज के आगे नहीं जा पाते याद रखो कंबल की गर्मी में गोल्स पूरे नहीं होते जो लोग चुनौतियां या कष्ट उठाने को तैयार नहीं होते वह धीरे-धीरे दुनिया की बढ़ती भीड़ में गुम हो जाते हैं।

आपके पास अभी समय है, संसाधन है। कल समय नहीं जिम्मेदारियां होंगी आज तय करो क्या मैं कंसिस्टेंसी और इंटेंसिटी से मेहनत करने को तैयार हूं, क्या आज मैं रिजेक्शन झेलने तैयार हूं? दोबारा सीखने और अकेले चलने तैयार हूं इसके बाद डेडिकेशन बनाने के लिए प्रोसेस पर भरोसा करना सीखो रोनाल्डो की तरह पहले गोल्स बनाओ फिर प्रोसेस तय करो कि हर दिन मुझे यह पांच काम इस तरह से करने हैं और समय के साथ इन्हें बेहतर करते जाना है कितनी भी कठिनाई हो मुझे बस प्रोसेस पर टिके रहना है अगली प्रैक्टिकल टप बहुत काम की है कठिन अभ्यास के लिए विजुलाइजेशन हम कठिन प्रैक्टिस करते हैं तो दिमाग और शरीर थकता है लेकिन दिमाग का काम तो शरीर को कष्ट से बचाने का है।

इसलिए अगली बार कठिन काम करने का मन ही नहीं होता। इसलिए दिमाग अनजाने में कठिन प्रैक्टिस को टाल रहता है डेविड कगन कहते हैं। मैं ट्रेनिंग के सबसे कठिन और बोरिंग हिस्से को विजुलाइज करता हूं जैसे मैंने 60-60 मिनट ध्यान से पढ़ा बोरिंग टॉपिक होने के बावजूद बार-बार फोकस करता रहा जिस कारण मैंने समय रहते टास्क अच्छे से पूरा किया और उसके बाद मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही है। इस प्रकार कठिन काम को पहले ही विजुलाइज करने से कठिन अभ्यास के लिए भी कमिटमेंट और जोश पैदा होता है।

अगली बात लॉन्ग टर्म कमिटमेंट फेलियर में क्रोध देखो जो लोग प्रोसेस फॉलो करते हैं उन्हें अपने फेलियर में ग्रोध दिखती है। क्योंकि वह समझ पाते हैं कि मुझे प्रोसेस के यह स्टेप्स बेहतर करना है। जिससे रिजल्ट्स अपने आप बेहतर होंगे अगली बात डेडिकेशन के लिए ग्रेटू प्रैक्टिस यह बहुत प्रैक्टिकल तरीका है जिससे नेगेटिव इमोशनल रिएक्शन नियंत्रण में आते हैं हर दिन जीवन में आने वाले फ्रस्ट्रेशन गलतियों अपमान और बैड लक सबके लिए धन्यवाद दो क्योंकि यह वो रॉ मटेरियल है।

जो आपके आने वाला जीवन बेहतर बनाएंगे ऐसा करने से आप विचलित नहीं होते और लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए कमिटेड रहते हो। दोस्तों बस यही तरीका है अपने अंदर डेडिकेशन पैदा करने का और उस जीवन के लिए कमिटेड होने का जो आप बनाना चाहते हो।

दोस्तों अभी हाल ही में मैंने क्विट पॉन इजली नामक किताब पढ़ी इस किताब में बताया गया कि हम विल पावर की कमी के कारण नहीं या शरीर की इच्छा के कारण नहीं बल्कि गलत बिलीफ सिस्टम के कारण पन नहीं छोड़ पाते, मैं काम के किस्से लाता रहूंगा हिम्मत हरकत होशियारी हम जीतेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×