Motilal Oswal Controversy: मोतीलाल ओसवाल की मुश्किलें क्यों बढ़ती जा रही हैं? Kaynes Technology Scam Rumour Explained

Motilal Oswal की मुश्किलें बढ़ती क्यों जा रही हैं?
Motilal Oswal फाइनेंसियल सर्विसेज की हालत पिछले कुछ टाइम से कुछ ऐसी हो गई है कि आज वो यह कहने पर मजबूर हो गए हैं। पता नहीं ऐसे डेंजरस सिचुएशन में मैं ऑटोमेटिकली आगे कैसे आ जाता हूं। अभी जनवरी की बात करते हैं तो ऐसा रूमर फैलने लगा सोशल मीडिया पर कि कल्याण ज्वेलर के एक एंप्लई ने नोटों का पूरा-पूरा गट्ठा बंडल मोतीलाल ओसवाल के एंप्लई को दे दिया और उनसे यह कहा कि आप हमारे शेयर प्राइसेस पंप करो यानी और ज्यादा ऊपर बढ़ाओ। अब जैसे ही रूमर्स मार्केट में फैलने लगे, कल्याण ज्वेलर के शेयर्स धना धन गिरने लगे। गिरते-गिरते 37% तक यह गिर गए। उसी के साथ मोतीलाल ओसवाल के खुद के शेयर्स भी 9% तक गिर गए थे। फिर क्लेरिफिकेशन आया कि यह बस रूमर्स थे। लेकिन तब तक जो नुकसान होना था वो हो चुका था। इमेज जो खराब होनी थी वो हो चुकी थी। मतलब इंटरेस्टिंग चीज तो यह है कि कल्याण ज्वेलर के जो शेयर्स हैं वो उस शौक से आज तक उभर नहीं पाए। अभी भी उनके शेयर प्राइस ₹500 के करीब है जो जनवरी के प्राइस से 30% अभी भी डाउन है। और मोतीलाल ओसोल के खुद के शेयर्स भी अभी उसी लेवल पर है जिस पर वह जनवरी में थे।
जनवरी का बड़ा विवाद — “Kalyan Jewellers Rumour”
इसी बीच मार्केट में अभी एक और रूमर फैलने लगा है और वह यह है कि मोतीलाल ओसवाल की दो कंपनीज़ ने मिलकर केस टेक्नोलॉजी के शेयर्स को मैनिपुलेट किया है। इसका असर क्या हुआ? तो मोतीलाल ओसवाल एक हफ्ते में 5% डाउन है और केंस टेक्नोलॉजी 7% है। यानी कि ये जो साल है 2025 ये मोतीलाल ओसवाल के लिए तो अच्छा शुरू नहीं हुआ और लगता है कि अच्छे से खत्म भी नहीं होने वाला। अब क्या है यह रूमर्स और एलगेशन जिसकी वजह से यह कंट्रोवर्सी हो रही है और इस बार क्या यह सिर्फ रूमर्स है या फिर इसमें कुछ सच्चाई भी है इस पर हमने डीप में जाकर रिसर्च किया और जो चीजें पता चली वो आपके सामने अभी रखने वाले हैं।
Kaynes Technology: कौन है और क्या करती है?
सीसी है यह 18th नवंबर की है। लेकिन इसकी शुरुआत फोर्थ नवंबर को हुई है। किस टेक्नोलॉजी के बारे में थोड़ा सा आपको बता दूं कि यह जो कंपनी है, यह एंड टू एंड मैन्युफैक्चरिंग सर्विज ऑफर करती है ऑटोमोटिव, डिफेंस, इंडस्ट्रियल, एरोस्पेस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनीज़ को। यानी कि हाई एंड इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स ये बनाते हैं। अगर आसान भाषा में बात करूं, हुआ यह कि 4th नवंबर को इन्होंने अपने क्वार्टरली रिजल्ट्स पब्लिश किए और रिजल्ट्स काफी अच्छे रहे। इनका नेट प्रॉफिट पिछले साल से कंपेरेटिवली 100% से ज्यादा बढ़ा। रेवेन्यू 58% से ज्यादा बढ़ा और ऑर्डर बुक, मार्जिनस और ग्रोथ आउटलुक सारे के सारे बड़े जबरदस्त थे।
Motilal Oswal की 5 November Research Report – “23% Upside!”
अब इसी के 1 दिन बाद ही मोतीलाल ओसवाल की जो सेल साइड रिसर्च फर्म है वो इस पर एक रिपोर्ट पब्लिश करती है। रिपोर्ट क्या है? तो वह यह वाली रिपोर्ट है जो आप सामने देख पा रहे हो। यह रिपोर्ट आप देखिए 5th नवंबर को इशू की गई। इसमें टारगेट प्राइस कितनी दी है? ₹8,200 की। यानी कि करंट प्राइस से 23% की अपसाइड दिखाई गई। 23% यह और ऊपर जा सकता है। तो यह 10 पेज की पूरी रिपोर्ट है। इसकी अगर अब मैं समरी बताऊं आपको तो इस रिपोर्ट में 12 मंथ्स का टारगेट प्राइस दिया गया है। ₹8,200। इसके अलावा रिपोर्ट में स्ट्रांग क्वार्टरली रिजल्ट की बात की है। ऑर्डर बुक 50% से बड़ा है। ग्रोथ फैक्टर्स काफी अच्छे हैं। मैनेजमेंट प्रोजेक्शंस को पूरे कर रहे हैं लगातार और बाकी सारी कई सारी बातें यहां पर हो रही है। तो मोटा-मोटी यहां पर आपको समझ में आ गया कंपनी की अच्छाई हो रही है इस रिपोर्ट में और लेकिन एक एक दो कंसर्न भी है। कंपनी के वैल्यू्यूएशन के बारे में कंसर्न बताया गया जैसे मैं थोड़ा आगे आपको बताता हूं। तो यह रिपोर्ट किस तारीख की है? याद रखना फिफ्थ नवंबर 5 नवंबर की है। अब इसके बाद फास्ट फॉरवर्ड 13 दिन आगे चलते हैं और 18th नवंबर की तारीख पर आते हैं।
18 November: ब्लॉक डील ने मचा दी हलचल।
अब इस 18 तारीख को क्या हुआ कि प्रमोटर्स के लिए जो लॉक इन पीरियड था 1-1/2 साल का वो पूरा हुआ। अब ये सेबी का रूल क्या है आपको आसानी से समझाता हूं। तो यह रूल यह कहता है कि कंपनी के जो प्रमोटर्स हैं वो आईपीओ आने के बाद 1-1/2 साल तक अपने 20% शेयर्स बेच नहीं सकते। तो कंपनी के एटलीस्ट 20% जो शेयर्स हैं वो 1ढ़ साल के लिए आईपीओ आने के बाद लॉक हो जाते हैं। यह इसलिए किया जाता है कि कंपनी के प्रमोटर्स शायद ऐसा ना करें कि शेयर प्राइस को बहुत ज्यादा रखे आईपीओ के टाइम और सारे शेयर्स बेचकर आईपीओ के बाद निकल कर भाग जाए। तो इसलिए यह 18 मंथ्स का लॉक इन पीरियड रखा जाता है। अब Motilal Oswal यहां पर कोई प्रमोटर तो नहीं था कंपनी का लेकिन Motilal Oswal का जो मिड फंड है उसकी Kaynes Technology में अच्छी खासी बड़ी होल्डिंग थी। अब देखिए सोचने वाली बात यह है कि जनवरी में जो कंट्रोवर्सी हुई थी वह इसी फंड को लेकर हुई थी कि इसी फंड ने मिड कैप फंड ने जो कल्याण ज्वेलर्स है उसकी शेयर प्राइस बढ़ाई है जबरदस्ती।
Twitter पर सफाई — Motilal Oswal ने क्या कहा?
अब मैंने आपको क्या बताया था थोड़े टाइम पहले कि 5 तारीख को मोतीलाल ओसवाल की रिसर्च फर्म ने क्या बताया था? 5 तारीख को उन्होंने यह बताया कि Kaynes Technology में काफी सारी अपसाइड है 23% की और बाय रेटिंग उन्होंने यहां पर दी थी। तो ऐसे में मोतीलाल ओसवाल की जो एसेट मैनेजमेंट कंपनी है जो उसकी म्यूच्यूल फंड चलाती है उसे क्या करना चाहिए? या तो Kaynes Technology के शेयर्स और खरीदने चाहिए या फिर जो शेयर्स खरीदे हैं वह होल्ड करने चाहिए क्योंकि उनकी दूसरी फर्म तो कह ही रही है कि 23% अपसाइड है। लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा किया जिससे लोग हैरान हो गए। उन्होंने शेयर्स बेच दिए। 18 तारीख को दो बल् डील्स उन्होंने की। पहले में उन्होंने 210 करोड़ के शेयर्स बेचे और दूसरे में उन्होंने 279 करोड़ के बेचे। कुल मिलाकर 489 करोड़ यानी लगभग 500 करोड़ के शेयर्स उन्होंने बेच दिए। और इसका रिजल्ट क्या होना था? Kaynes Technology के शेयर्स तुरंत 6% से उसी दिन गिर गए और तुरंत ही वो सोशल मीडिया पर फैलने लगे कि देखो भाई इन्होंने 5 तारीख को बाय रेटिंग दी जिससे लोग इन केस टेक्नोलॉजी के शेयर्स और खरीदे फिर शेयर प्राइस ऊपर चली गई और फिर ऊपर गई प्राइस पर 18 तारीख को इनके म्यूचल फंड ने शेयर्स बेच दिए। तो लोग यहां पर मोतीलाल ओसवाल पर ये आरोप लगा रहे हैं कि यह सारी चीजें उन्होंने जानबूझकर की है। उन्होंने जानबूझकर शेयर प्राइस बढ़ाने के लिए पहले बाय रेटिंग दी और फिर म्यूचल फंड के जरिए शेयर्स बेच दिए। जैसे ही यह चीज बाहर आ गई, मोतीलाल ओसवाल के शेयर्स गिरने लगे।
क्या एक ही ग्रुप को रिसर्च + म्यूचुअल फंड दोनों चलाने चाहिए?
Motilal Osawal के बारे में मामला इतना बढ़ गया कि मोतीलाल ओसवाल के कोफाउंडर मिस्टर मोतीलाल ओसवाल को खुद Twitter पर आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने यह ट्वीट करके कहा कि जो रूमर्स सोशल मीडिया पर सर्कुलेट हो रहे हैं उनकी रिसर्च टीम को लेकर, उनके फंड मैनेजर्स को लेकर, यह बिल्कुल गलत है, बेसलेस है और इरिस्पांसिबल है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि उनकी रिसर्च फर्म यानी सेल साइड रिसर्च फर्म और एसेट मैनेजमेंट कंपनी दोनों कंप्लीटली अलग है। फंड मैनेजमेंट टीम स्ट्रिक्टली इंटरनल रूल्स को फॉलो करती है जो इन्वेस्टर्स के फायदे के हैं। और उन्होंने आगे यह भी कहा कि दे रिजर्व द राइट टू टेक लीगल एक्शन ऐसे लोगों पर जो यह फॉल्स इंफॉर्मेशन स्प्रेड कर रहे हैं। अब सफाई तो यहां पर हो गई लेकिन इसके बावजूद भी मोतीलाल ओसवाल की शेयर प्राइस की गिरावट जारी रही। तो ओवरऑल देखा जाए तो इस पूरी कंट्रोवर्सी में दो कंपनीज़ इन्वॉल्वड हैं। एक सेल साइड रिसर्च कंपनी है जो कंपनीज़ पर रिसर्च करके रिपोर्ट्स निकालती है विद टारगेट प्राइस और एक है एसेट मैनेजमेंट कंपनी जो म्यूच्यूल फंड का बिज़नेस चलाती है।
Through misuse of social media handles, baseless rumours are being spread about research and fund management of the Motilal Oswal Group. I want to state unequivocally that these allegations are rubbish, false and completely unjustified. The ill-informed people are just creating…
— Motilal Oswal (@MrMotilalOswal) November 20, 2025
Sell-Side vs Buy-Side — असली कंफ्यूजन यही है।
अब जैसे मिस्टर मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि ये दोनों कंपनी की रिसर्च टीम अलग-अलग है। एक रिसर्च टीम सेल साइड है तो दूसरी बाय साइड है। और इन दोनों टीम्स का इंटरेक्शन बिल्कुल भी नहीं होता है और सेबी के हिसाब से भी ये दोनों कंपनीज़ को इंडिपेंडेंटली काम करना होता है। तो यहां पर एक और दिक्कत इन्वेस्टर्स और सेबी के दिमाग में जरूर आई होगी कि अगर कोई कंपनी म्यूच्यूल फंड कंपनी चला रही है तो क्या उसी ग्रुप को रिसर्च फर्म चलाने देना चाहिए क्योंकि फिर ऐसा बार-बार हो सकता है क्योंकि वो दोनों अलग-अलग काम कर रही है। अब हो सकता है कई बार कि जाने अनजाने में हो लेकिन कई बार ऐसा भी हो सकता है कि जानबूझकर भी किया हो। अब इस केस में आपको क्या लगता है? आप कमेंट करके बताइए। और मुझे लगता है और एक इंटरेस्टिंग चीज अगर एक ही ग्रुप म्यूच्यूल फंड कंपनी और रिसर्च फर्म चला रही है तो उस रिसर्च फर्म के रिसर्च रिपोर्ट में यह भी लिखना चाहिए कि जो भी शेयर्स की वो बात कर रहे हैं उनके शेयर्स उनकी म्यूच्यूल फंड कंपनी ने खरीदे हैं क्या? खरीदे हैं तो कितनी मात्रा में खरीदे हैं या कितनी होल्डिंग्स हैं। इसके डिस्क्लेमर जरूर होने चाहिए। जब मैंने इनका रिसर्च रिपोर्ट देखा केस टेक्नोलॉजी का तो उसमें कहीं पर भी यह मेंशन नहीं किया गया कि हमारी म्यूच्यूल फंड कंपनी है जो दूसरी उसने केस टेक्नोलॉजी के शेयर्स खरीदे हैं। अब यह जो चीज है कि एक ग्रुप के अंडर मल्टीपल कंपनीज़ जो अपोजिट सर्विज प्रोवाइड कर रही है यह सिर्फ मोतीलाल ओसवाल में नहीं हो रहा है। यह आपको नवामा में होते हुए दिखेगा। वह कंपनी पीएमएस की सर्विस देती है और उसी के साथ रिसर्च रिपोर्ट भी निकालती है। अब रिसर्च रिपोर्ट इशू करने की बात आती है तो वहां पर क्रेडिबिलिटी की बात आती है कि कितनी सच्चाई उन रिपोर्ट्स में है। तो कई सारे जो रिसर्च रिपोर्ट्स हैं वो इंट्राडे वगैरह की रिसर्च रिपोर्ट निकालते हैं। तो प्रैक्टिकली अगर सोचा इट इज़ इंपॉसिबल कि एक दिन में उस शेयर में क्या होगा? 1 दिन में धंधा तो नहीं बदल रहा है। 1 दिन में अचानक से ग्रोथ तो नहीं हो रही है। तो 1 दिन में शेयर प्राइस में अचानक नोबडी कैन प्रेडिक्ट कि क्या हुआ? और बहुत सारी रिसर्च रिपोर्ट ये जो कंपनीज़ इशू करती है इसमें से बहुत सारे तो सिर्फ शॉर्ट टर्म इंट्राडे वगैरह होते हैं। मेरे हिसाब से रिसर्च रिपोर्ट में एक ही चीज सेंस बनाती है वो है लॉन्ग टर्म के रिसर्च रिपोर्ट कि लॉन्ग टर्म में भाई क्या होगा? एक्चुअली वी आर आल्सो आर लेकिन हम शॉर्ट टर्म में कभी भी रिसर्च रिपोर्ट नहीं प्रोवाइड करते। हमारे जो भी रिसर्च रिपोर्ट्स हैं वो भी लॉन्ग टर्म ही है जो हमारी कम्युनिटी प्रोमियम प्रोवाइड करते हैं।
Kaynes Technology की गिरावट — वैल्यूएशन की ओवरहीटिंग।
Kaynes Technology के वैल्यू्यूएशन की तो देखिए 4 नवंबर के क्वार्टरली रिजल्ट्स अच्छे आए थे। मोतीलाल की रिपोर्ट भी अच्छे आई थी। लेकिन आप देखिए शेयर्स के हालात ये 4 नवंबर से ही गिर रहे हैं। रीजन 100 के ऊपर इसका पीई चल रहा था और लेकिन जिस हिसाब से क्रेजी वैल्यू्यूएशन कंपनी का बढ़ा है वो वैल्यू्यूएशन लंबे समय तक सस्टेन रहना काफी मुश्किल हो जाता है।
Short-Term Research Reports से दूर रहें।
इसलिए जो भी लोग रिसर्च रिपोर्ट पर डिपेंड करते हैं मैं उनसे सजेस्ट करूंगा भाई शॉर्ट टर्म में तो बिल्कुल भी ध्यान मत दो। लॉन्ग टर्म का रहेगा तो थोड़ा बहुत रेफरेंस लो और खुद का भी एनालिसिस करो। तो बाकी आपकी क्या राय है इस केस पर? नीचे कमेंट करके जरूर बताइए। और क्या एक ग्रुप में सेल साइड और बाय साइड दोनों होने चाहिए?