Madina Bus Accident: 70 साल के नसीरुद्दीन का पूरा परिवार खत्म – तीन पीढ़ियों की दर्दनाक कहानी

दर्द से भरी सुबह — 17 नवंबर का बस हादसा
70 साल के नसीरुद्दीन का पूरा परिवार 17 नवंबर को हुए बस हादसे में खत्म हो गया। पांच बेटे बेटियां, उनके अपने-अपने जीवन साथी और सबके बच्चे। हर किसी ने इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गवा दी। तीन-चार साल के नन्हे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग हर कोई उस बस में सवार था। जिनकी आंखें अब हमेशा के लिए बंद हो गई हैं। उमरा की नियत से सऊदी अरब गए एक ही परिवार के 18 लोग तीन पीढ़ियां अब नहीं लौट पाएंगे।
यह खबर 17 नवंबर की सुबह आई जब सऊदी अरब के शहर मदीना के पास एक भीषण बस हादसा हो गया। इसमें हैदराबाद से आए शेख नसीरुद्दीन के पूरे खानदान की जिंदगी एक ही पल में खत्म हो गई। यह हादसा इतना भयानक था कि बस में सवार ज्यादातर लोगों की पहचान तक मुश्किल हो गई।
बस कैसे हादसे का शिकार हुई?
सऊदी शासन के अधिकारियों के मुताबिक बस तेल के टैंकर से जा टकराई और चंद ही सेकंड्स में आग की लपटों ने पूरे वाहन को घेर लिया। बस में 46 तीर्थ यात्री सवार थे। 45 की मौत हो गई। इनमें 18 लोग एक ही परिवार के थे।
रिश्तेदारों की पीड़ा — इंडिया टुडे की रिपोर्ट
इंडिया टुडे के Writer Apoorva ने हैदराबाद में शेख नसीरुद्दीन के घर पर पहुंचकर उनके रिश्तेदार मोहम्मद असलम से बात की।
उनके शब्दों में—
“सलााउद्दीन भाई हमारे फुफेरे भाई होते हैं। उनके फादर नज़रुद्दीन हमारे फूफा होते हैं। उसमें फैमिली के साथ पूरे 18 लोग हैं। 18 लोग में उसमें नज़रुद्दीन साहब के तीन बेटी, दो बहू, पांच पोतरे, एक पोतरी प्लीज दो नवासे ऐसा 18 लोग खुले हैं। एक ही फैमिली के हैं। जी और एक ही फैमिली के हैं।“
“ये उनके बड़े भाई सिराज भाई बोल गए तो यूएस में है अब तो प्रेजेंट। अब तो ये फैमिली में कोई भी नहीं है। गवर्नमेंट से ये गुजारिश है कि हमको ये इस पे फुल इंक्वायरी होना चाहिए। उस पे क्या हादसा हुआ ये क्या हुआ ये हमको तो पता नहीं। मगर ये एजेंसी ट्रैवल एजेंसी जो भी है उस पे इंक्वायरी होना चाहिए और सक्सेसर उनको सजा मिलना चाहिए।“
रिश्तेदारी पर बोले—
“रिलेशनशिप में बोल तो हमारे फूफा होते नज़रुद्दीन साहब। उनके बेटे हमारे फूफे भाई होते हैं।“
उमरा पूरा कर वापस लौटते समय हादसा
एक अन्य रिश्तेदार मोहम्मद आसिफ ने बताया कि सब उमरा करने के लिए 8 दिन पहले निकले थे। उमरा पूरा करके मदीना लौट रहे थे। रात 1:30 बजे हादसा हुआ और बस आग में जलकर राख हो गई।
उनके मुताबिक जिन लोगों की पहचान हुई है, उनमें—
- 70 साल के शेख नसीरुद्दीन
- पत्नी 62 साल की अख्तर बेगम
- बेटा सलाहाउद्दीन (42 साल)
- बेटियां अमीना, रिजवाना और शबाना
- दंपत्ति के बच्चे
सभी शामिल थे।
आसिफ कहते हैं—
“हम बस यह चाहते हैं कि सही जांच हो और जिनकी लापरवाही से हुआ उन्हें सजा मिले।“
18 लोगों की पूरी सूची — एक ही परिवार की तीन पीढ़ियां
जिन 18 लोगों के नाम परिवार वालों ने बताए वो यह हैं—
- शेख नसीरुद्दीन खानदान के मुखिया
- अख्तर बेगम (नसीरुद्दीन की पत्नी)
- एस के सलाहाउद्दीन (बड़ा बेटा)
- फरहाना सुल्ताना (सलाहाउद्दीन की पत्नी)
- शेख ज़ैनुद्दीन
- रिदा ताज़न
- तस्मिया तहरीन
- आमीना बेगम (बड़ी बेटी)
- अनीस फातिमा
- शबाना बेगम (दूसरी बेटी)
- हुजैफा जाफर
- रिजवाना बेगम (सबसे छोटी बेटी)
- मरियम फातिमा
- मोहम्मद शाहजैन
- सना सुल्ताना (नसीरुद्दीन की बहू)
- मेहरिश
- उजैरुद्दीन
- उमैजा
शवों की पहचान मुश्किल — पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट
हैदराबाद पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनार के मुताबिक हादसे में 45 भारतीयों की मौत की आशंका है। ज्यादातर हैदराबाद के रहने वाले थे। शव पूरी तरह झुलस चुके हैं, इसलिए पहचान में कठिनाई आ रही है।
इंडियन एंबेसी ने जिद्दा से विशेष टीम भेजी है।
तेलंगाना हज कमेटी के मुताबिक 10 बच्चे भी इस हादसे में मारे गए हैं।
बस में कौन–कौन सवार थे?
बस में—
- 18 पुरुष
- 18 औरतें
- 10 बच्चे
कुल 46 लोग थे।
इनमें 43 हैदराबाद से, 2 साइबराबाद से और 1 हुबली कर्नाटक से था।
एक व्यक्ति जिंदा बच पाया — मोहम्मद शोएब की कहानी
बस में सवार मोहम्मद शोएब ने खिड़की तोड़कर छलांग लगाई और जान बचाई। उनके हाथ झुलस गए हैं और इलाज चल रहा है।
परिवारों की अंतिम इच्छाएँ और सरकारी मदद
तेलंगाना सरकार ने अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद अजरुद्दीन को सऊदी भेजने का निर्णय लिया है।
हर मृतक के दो रिश्तेदारों को पहचान और अंतिम संस्कार के लिए भेजा जाएगा।
₹5 लाख मुआवजा देने की घोषणा भी की गई है।
स्थानीय रिवाज के मुताबिक सभी शवों को सऊदी अरब में दफनाया जाएगा।
हैदराबाद में पसरा मातम
हैदराबाद की गलियों में सन्नाटा पसरा है।
दीवारों पर तस्वीरें अब सिर्फ याद बनकर रह गई हैं।
रिश्तेदार सिर्फ इतना कह पा रहे हैं—
“इन्नाल्लाह व इन्ना इलाही राजी।”